जीएसटी: सालाना ऑडिट के दबाव से मुक्त होंगे एक करोड़ से अधिक फर्म, हर साल हो सकती है 30000 करोड़ रुपये की बचत

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जीएसटी की सालाना ऑडिट किसी चार्टेड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट से वेरिफाई कराने की बाध्यता को समाप्त करने के सरकार के निर्णय से एक करोड़ से अधिक फर्मों को काफी राहत मिलेगी। टैक्स मामले के दो जानकारों के मुताबिक इस फैसले से इन फर्मों को न केवल करीब 30,000 करोड़ रुपये सालाना ऑडिट फीस बचाने में मदद मिलेगी बल्कि अनुपालन बोझ भी कम होगा।

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एक फरवरी को पेश किए बजट में सालाना रिटर्न में रिकॉन्सिलिएशन स्टेटमेंट को किसी चार्टेड अकाउंटेंट या कॉस्ट अकाउंटेंट से वेरिफाई कराने की बाध्यता को समाप्त करने का प्रस्ताव है। वहीं इस प्रस्ताव के मुताबिक जरूरत पड़ने पर सेल्फ सर्टिफिटाइड स्टेटमेंट भी मान्य होगा। जीएसटी के एक अधिकारी के मुताबिक, “वित्त विधेयक, 2021 कानून में संशोधन करेगा, जिसे जल्द ही नोटिफाई किया जाएगा।

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इसका मूल उद्देश्य जीएसटी कंप्लायन बोझ को कम करने,  बिजनेस, विशेष रूप से छोटी फर्मों को सहायता करने के वास्ते पेशेवरों की ऑडिटिंग फीस का भुगतान करने में मदद करना है। ” दरअसल यह फैसला पिछले साल मार्च में हुई जीएसटी काउंसिल की बैठक में ले लिया गया था, लेकिन कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के चलते इसे अमल में लाया नहीं जा सका। 
 
विशेषज्ञों के मुताबिक सेल्फ सर्टिफिकेशन पेशेवरों से प्रमाणीकरण की आवश्यकता को समाप्त करेगा, सालाना कंप्लायन में आसान करेगा और सर्टिफिकेशन की लागत को बचाएगा। हालांकि, व्यवसायों को यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी कि जीएसटी रिटर्न में घोषित टर्नओवर ऑडिटेड वित्तीय विवरणों के साथ सामंजस्य स्थापित करता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट सुनील कुमार, जो टैक्स रिसर्च और सलाहकार फर्म टैक्समैन के डिप्टी जनरल मैनेजर हैं, ने कहा कि वर्तमान में, एक स्वतंत्र पेशेवर द्वारा रिव्यू किया जाता है, जो टैक्सपेयर को बेमेल चीजों को उजागर करता है। ऐसे मामलों में जहां ऐसे बेमेल खातों पर टैक्स का भुगतान नहीं किया जाता है तो रिपोर्ट पेशेवर द्वारा योग्य है। मौजूदा प्रक्रिया गैप को समय पर पहचान करने में सक्षम बनाती है। स्व-प्रमाणीकरण प्रक्रिया समय पर इस तरह के बेमेल की पहचान नहीं कर सकती है।
 

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